पर्श्वोत्तनासन योग करने से पहले रखें यह सावधानियां

उच्च रक्तचाप से पीड़ित लोग पूरी तरह से इस योग का अभ्यास करने से बचें।
यदि आपको घुटने की समस्याएं या गठिया हैं तो आप इस आसन को ना करें।
अगर आपको गर्दन दर्द की समस्या है, तो आप इस योग को ना करें।
अगर आपको हाई ब्लड प्रेशर या पीठ में चोट है, तो आपको अर्ध पर्श्वोत्तनासन योग करना चाहिए।
आपके हैमस्ट्रिंग में चोट है तो इस आसन को करने से बचें।
यह मुद्रा गर्भवती महिलाओं को दूसरी और तीसरी तिमाही में लाभ देती है, हालांकि इस मुद्रा को करने से पहले उन्हें डॉक्टर से परामर्श लेना चाहिए।

पर्श्वोत्तनासन करने के बाद करे ये आसन

पर्श्वोत्तनासन योग करने से पहले आप नीचे दिए गए कुछ आसन का अभ्यास करें, जिससे आपको इसक योग आसन का पूरी तरह से लाभ मिल सके –

वीरभद्रासन 1
वीरभद्रासन 2
उत्कटासन
उत्थित हस्त पादंगुष्ठासन
अर्ध बद्ध पद्मोत्तासन
 

पर्श्वोत्तनासन योग के लाभ मासिक धर्म और रजोनिवृत्ति में

पर्श्वोत्तनासन योग प्रजनन अंगों को भी उत्तेजित करता है और मासिक धर्म और रजोनिवृत्ति के लक्षणों को कम करने में मदद करता है। यह योग स्मूथ डिलीवरी के लिए  एक अच्छा प्रसव पूर्व योग आसन है। साथ में यह पैल्विक फ्लोर को बढ़ाने और मजबूत करता है।

शारीरिक संतुलन के लिए करे पर्श्वोत्तनासन योग

पर्श्वोत्तनासन योग करने के लिए आपको अधिक संतुलन बनाने की आवश्यकता होती हैं जो आपके शरीर को मजबूत करता हैं। पर्श्वोत्तनासन योग आसन शरीर की मुद्रा को बेहतर बनाने में मदद करता है, और आपके शरीर में संतुलन की भावना को भी बनाए रखता है। यह आसन आपकी सहनशक्ति भी बढ़ाने में मदद करता हैं। यह पोज़ पैरों, गले और छाती को भी एक शक्तिशाली खिंचाव देता हैं। यह आसन पीठ में होने वाले दर्द से छुटकारा दिलाने में मदद करता हैं।

मस्तिष्क को शांत करे पर्श्वोत्तनासन योग

पर्श्वोत्तनासन योग हमारे मस्तिष्क को शांत करने के लिए एक अच्छा योग आसन है। यह योगासन ना केवल आपको भौतिक रूप से लाभदायक हैं बल्कि यह आपके दिमाग को भी स्वस्थ रखता हैं। पर्श्वोत्तनासन आपके ध्यान को केन्द्रित करने में भी मदद करता हैं जिससे आप किसी भी बात को लम्बे समय तक याद रख सकते है। यह आपके मन को शांत रखता हैं और तनाव को दूर करने में मदद करता हैं। पर्श्वोत्तनासन योग स्मरण शक्ति को बढ़ाता हैं जिससे किसी भी बात को लम्बे समय तक याद रखा जा सकता हैं।

मजबूत पैरों के लिए करे पर्श्वोत्तनासन योग

पर्श्वोत्तनासन योग पैरों को मजबूत करता हैं। ऊँची एड़ी के जूते में लंबे समय तक बैठने या अत्यधिक चलने के बाद आपके पैरों में दर्द होना लगता है। इस योग को करने से पैरो में होने वाली वैरिकाज़ नसों को राहत मिलती है। ये नसें हृदय में अनियमित रक्त की आपूर्ति का संकेत देती हैं और जिससे लंबे समय तक स्वास्थ्य सम्बंधित समस्या बनी रहती हैं। पर्श्वोत्तनासन योग पैरों से संबधित सभी समस्याओं को दूर करने में आपकी मदद करता हैं।

पर्श्वोत्तनासन योग रीढ़ को मजबूत करे

अपनी रीढ़ को मजबूत करने के लिए आपको पर्श्वोत्तनासन योग बहुत ही लाभदायक होता है। यह योग कूल्हों, कंधों, हॅम्स्ट्रिंग और कलाईयों में खिचाव लाता है और उनको मजबूत करता है। पर्श्वोत्तनासन आसन करते समय रीढ़ से आगे की ओर झुका जाता है। पीठ के दर्द को कम करने में सहायता करता है। जो लोग डेस्क पर बैठ कर नौकरी करते है उनकी पीठ दर्द को ठीक करने के लिए पर्श्वोत्तनासन योग लाभदायक होता हैं।

पर्श्वोत्तनासन के फायदे पाचन में

यह योग पेट और उसके अंगो को उत्तेजित करके एसिडिटी, कब्ज और पेट की कई समस्याओं के इलाज में मदद करता है। पर्श्वोत्तनासन योग आसन को करते समय आपके पेट और आंतों में दबाव पड़ता है जो पाचन प्रक्रिया को भी बढ़ाता है। इस योग से आंतरिक पेट के अंगों की एक हल्की मालिश होती जो कि पेट की मांसपेशियों को टोन करता है।

पर्श्वोत्तनासन योग के फायदे

अन्य योगों की तरह ही पर्श्वोत्तनासन योग आसन हमारे शरीर के लिए बहुत ही फायदेमंद हैं। यह हमारे शरीर में होने वाली कई प्रकार की समस्या से हमें दूर रखता हैं। आइये इसके लाभों को विस्तार से जानते हैं।

शुरुआती लोगों के लिए पर्श्वोत्तनासन करने की प्रारंभिक टिप

अगर आप बिगिनर है और योग अभ्यास की अभी-अभी शरुआत कर रहे हैं तो हो सकता हैं की आपको पर्श्वोत्तनासन योग आसन को करते समय दोनों हाथों को पीठ के पीछे ले जाने और दोनों को नमस्कार मुद्रा जोड़ने में थोड़ी कठिनाई हो सकती हैं क्योकि आपके हाथ पर्याप्त लचीले नहीं होते है तो इसके लिए आप अपने दोनों हाथों को पीठ के पीछे ले जाकर कमर के समानांतर रख लें। इसके अलावा आप प्रत्येक कोहनी को विपरीत हाथ से पकड़ सकते हैं। बिगिनर को पूरी तरह से नीचे झुकने भी कठिनाई हो सकती है तो आप इसे अभ्यास के साथ आसानी से कर सकते हैं।

“योग विज्ञान है” – ओशो

 योग विज्ञान है, विश्वास नहीं। योग की अनुभूति के लिए किसी तरह की श्रद्धा आवश्यक नहीं है। योग का इस्लाम, हिंदू, जैन या ईसाई से कोई संबंध नहीं है। 

जिन्हें हम धर्म कहते हैं वे विश्वासों के साथी हैं। योग विश्वासों का नहीं है, जीवन सत्य की दिशा में किए गए वैज्ञानिक प्रयोगों की सूत्रवत प्रणाली है। इसलिए पहली बात मैं आपसे कहना चाहूंगा वह यह कि  योग विज्ञान है, विश्वास नहीं। योग की अनुभूति के लिए किसी तरह की श्रद्धा आवश्यक नहीं है। योग के प्रयोग के लिए किसी तरह के अंधेपन की कोई जरूरत नहीं है।

नास्तिक भी योग के प्रयोग में उसी तरह प्रवेश पा सकता है जैसे आस्तिक। योग नास्तिक-आस्तिक की भी चिंता नहीं करता है। विज्ञान आपकी धारणाओं पर निर्भर नहीं होता; विपरीत, विज्ञान के कारण आपको अपनी धारणाएं परिवर्तित करनी पड़ती हैं। कोई विज्ञान आपसे किसी प्रकार के बिलीफ, किसी तरह की मान्यता की अपेक्षा नहीं करता है। विज्ञान सिर्फ प्रयोग की, एक्सपेरिमेंट की अपेक्षा करता है।