पेट की चर्बी कम करने के लिए प्राणायाम मार्जरासन

मार्जरासन योग पेट को कम करने में बहुत ही लाभदायक होता है। इस योग को करने से अधिक कैलोरी बर्न होती है जिसकी वजह से आसानी से वजन को कम किया जा सकता है। इस आसन को करने के लिए आप एक योगा मैट पर अपने सिर को सीधा रखें हुयें घुटने टेक के अपने दोनों हाथों को जमीन पर रख लें। अब साँस को अन्दर लेते हुए अपने सिर को पीछे की ओर तथा अपनी ठोड़ी को ऊपर करें।

अब साँस छोड़ते हुए सिर को सीधा करें। इसके बाद फिर से साँस को अपने सिर को नीचे करें और अपनी ठोड़ी को अपनी छाती से लगाने का प्रयास करें। इस आसन को कम से कम 5 से 6 बार करें। यह आसन पेट को कम करने के लिए लाभदायक होता हैं।

पेट कम करने के लिए कपालभाति प्राणायाम

कपालभाति वजन को कम करने के लिए सबसे अच्छा प्राणायाम है। जब आप इस योग को करते है तो अधिक गहरी साँस को लेते है। इससे आपके अंदर अधिक मात्रा में ऑक्सीजन जाता है। यह आपकी पेट की मांसपेशियों को मजबूत करता है। कपालभाति प्राणायाम पाचन क्रिया को ठीक रखता है जिसकी वजह से पेट को कम किया जा सकता है।

प्राणायाम का रहस्य व महत्व

कछुए की साँस लेने और छोड़ने की गति इनसानों से कहीं अधिक दीर्घ है। व्हेल मछली की उम्र का राज भी यही है। बड़ और पीपल के वृक्ष की आयु का राज भी यही है। वायु को योग में प्राण कहते हैं।

प्राचीन ऋषि वायु के इस रहस्य को समझते थे तभी तो वे कुंभक लगाकर हिमालय की गुफा में वर्षों तक बैठे रहते थे। श्वास को लेने और छोड़ने के दरमियान घंटों का समय प्राणायाम के अभ्यास से ही संभव हो पाता है।

जॉगिंग शुरू करने के लिए मैदान का चयन करें

मैदान का चयन करना जॉगिंग शुरू करने के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण होता है। आप मैदान का चयन मौसम से हिसाब से करें। एक अच्छी घास वाले के मैदान को आप आउटडोर जॉगिंग विकल्पों में चुन सकते हैं। एक नर्म सतह वाले मैदान को अपनी जॉगिंग के लिए चुनें।

जॉगिंग शुरू करने से पहले स्ट्रेच करें

अपनी मांसपेशियों को लचीला बनाने के लिए और शरीर को चोट से बचने के लिए स्ट्रेचिंग बहुत ही महत्वपूर्ण होती है। तनाव और चोट से बचने के लिए स्ट्रेचिंग शुरू करने से पहले अपनी मांसपेशियों को गर्म करना महत्वपूर्ण है। अपनी जॉगिंग करने के लिए स्ट्रेचिंग करने से पहले 5-10 मिनट वार्मअप करें। अपने जोड़ों को गर्म करने के लिए एरोबिक गतिविधि जैसे रस्सी कूदने में कम से कम 5 मिनट बिताएं जो आपके दिल की दर को बढ़ा देगा।

शुरुआती जॉगिंग के लिए महत्वपूर्ण टिप्स

जॉगिंग करते समय अपनी सांस को अपने मार्गदर्शक की तरह इस्तेमाल करें।
आपको जॉगिंग करते समय बातचीत करने में सक्षम होना चाहिए, और आपकी सांस भारी नहीं होनी चाहिए।
प्रति मील अपनी गति के बारे में चिंता न करें – यदि आप “टॉक टेस्ट” पास कर सकते हैं और हवा के लिए हांफे बिना पूरे वाक्यों में बात कर सकते हैं, तो आप सही गति से आगे बढ़ रहे हैं।
सुनिश्चित करें कि आप अपनी नाक और मुंह से सांस ले रहे हैं, और अपने मुंह से सांस छोड़ रहे हैं। उचित साँस लेना और गहरी पेट की साँस लेना आपको पेट के क्षेत्र ऐंठन से बचने में मदद करेगा।

दौड़ने के नियम में जॉगिंग पोस्चर भी है ज़रूरी

अधिकांस लोग जानते है कि धीरज और दृढ़ संकल्प के साथ आप लंबी दूरी तय कर सकते है। जॉगिंग का अधिकतम लाभ लेने के लिए शरीर की सही स्थिति भी होना बहुत ही आवश्यक होता हैं। जॉगिंग करते समय ध्यान रखें की आपका शरीर सीधा रहें। अपने शरीर का संतुलन बनायें और  वजन को पंजे के बीच में ही रखें। आपको वजन केवल एड़ी और उँगलियों पर नहीं रखना हैं।

जॉगिंग शुरू करने से पहले चलें

चलना एक प्रकार का वार्म अप होता हैं इसलिए आप जॉगिंग करने से पहले थोड़ी देर के लिए कुछ दूरी पैदल चल कर तय करें। यह खासकर उन लोगों के लिए है जो लोग अभी रनिंग की शुरुआत कर रहें है। इसे अलावा सप्ताह में 3-4 बार और एक दिन में 15-20 मिनट के लिए चलना शुरू करें। और धीरे धीरे चलने की गति बढ़ाएं, जब तक कि अगला कदम जॉगिंग न बन जाए।

“योग विज्ञान है” – ओशो

 योग विज्ञान है, विश्वास नहीं। योग की अनुभूति के लिए किसी तरह की श्रद्धा आवश्यक नहीं है। योग का इस्लाम, हिंदू, जैन या ईसाई से कोई संबंध नहीं है। 

जिन्हें हम धर्म कहते हैं वे विश्वासों के साथी हैं। योग विश्वासों का नहीं है, जीवन सत्य की दिशा में किए गए वैज्ञानिक प्रयोगों की सूत्रवत प्रणाली है। इसलिए पहली बात मैं आपसे कहना चाहूंगा वह यह कि  योग विज्ञान है, विश्वास नहीं। योग की अनुभूति के लिए किसी तरह की श्रद्धा आवश्यक नहीं है। योग के प्रयोग के लिए किसी तरह के अंधेपन की कोई जरूरत नहीं है।

नास्तिक भी योग के प्रयोग में उसी तरह प्रवेश पा सकता है जैसे आस्तिक। योग नास्तिक-आस्तिक की भी चिंता नहीं करता है। विज्ञान आपकी धारणाओं पर निर्भर नहीं होता; विपरीत, विज्ञान के कारण आपको अपनी धारणाएं परिवर्तित करनी पड़ती हैं। कोई विज्ञान आपसे किसी प्रकार के बिलीफ, किसी तरह की मान्यता की अपेक्षा नहीं करता है। विज्ञान सिर्फ प्रयोग की, एक्सपेरिमेंट की अपेक्षा करता है।