मुगदर एक्सरसाइज करने के फायदे सम्पूर्ण शारीरिक कसरत में –

मुगदल व्यायाम आपके शरीर में अधिक संख्या में मांसपेशियों पर काम करके आपको फिट रखने में काफी मदद करते हैं। मुदगल करने के फायदे आपको एक ही समय में अपने कंधों, हाथों, पीट और रीढ़ पर फोकस करने में मदद करते हैं। यह आपके शरीर में मांसपेशियों को एक साथ काम करने और उनको मजबूत बनने मदद करता हैं।

फेस स्लिम करने के लिए करे लिप पुल एक्सरसाइज

लिप पुल एक्सरसाइज चिन फैट को कम करने के लिए बहुत ही अच्छी एक्सरसाइज है। यह आपके चेहरे की मांसपेशियों को टोन करती है जिससे फेस आकर्षक दिखाई देता है।

लिप पुल एक्सरसाइज करने के लिए आप सबसे पहले सीधे खड़े जाएं।
अपने चेहरे को सामने की ओर सीधा रखें।
अब अपने नीचे के होंठों को जबड़े के साथ बाहर की ओर निकालें।
कुछ सेकंड के इसलिए इस स्थिति में रहें और फिर से सामान्य अवस्था में आ जाएं।
लिप पुल एक्सरसाइज के 10 रैप के 4 सेट करें।
 

नेल रबिंग एक्सरसाइज के पीछे विज्ञान

नाखूनों को घिसना बालायाम योग विज्ञान में एक्यूप्रेशर और रिफ्लेक्सोलॉजी हैं। रिफ्लेक्सोलॉजी (Reflexology) एक वैकल्पिक दवा है जिसमें विशिष्ट बिंदुओं पर दबाव डाला जाता है। यह आमतौर पर पैरों और हाथों के “रिफ्लेक्स एरिया (Reflex areas)” रूप में जानना जाता है, जो शरीर के अंगों में दर्द को ठीक करने या कुछ ग्रंथियों में राहत प्रदान करने के लिए विशिष्ट अंगूठे, उंगली और हाथ की तकनीक के साथ होता है।

थायराइड की समस्या और योग उपचार

 थायराइड मानव शरीर मे पाए जाने वाले एंडोक्राइन ग्लैंड में से एक है। थायरायड ग्रंथि गर्दन में श्वास नली के ऊपर एवं स्वर यन्त्र के दोनों ओर दो भागों में बनी होती है। और इसका आकार तितली जैसा होता है। यह थाइराक्सिन नामक हार्मोन बनाती है जिससे शरीर के ऊर्जा क्षय, प्रोटीन उत्पादन एवं अन्य हार्मोन के प्रति होने वाली संवेदनशीलता नियंत्रित होती है।

* यह ग्रंथि शरीर के मेटाबॉल्जिम को नियंत्रण करती है यानि जो भोजन हम खाते हैं यह उसे उर्जा में बदलने का काम करती है। इसके अलावा यह हृदय, मांसपेशियों, हड्डियों व कोलेस्ट्रोल को भी प्रभावित करती है।

बुजुर्गों के लिए योगासन की जरूरत?

कहा जाता है कि हम जिस वातावरण में रहते हैं उसका हमारी सेहत पर प्रभाव पड़ता है, इसलिए प्रकृति के बीच में रहने के साथ मित्रता अच्छे लोगों के साथ करनी चाहिए। वहीं उनकी अच्छी आदतों को अपनाना चाहिए। जैसा कि हम सब जानते और देखते आ रहे हैं कि, उम्र के बढ़ने के साथ-साथ डायबिटीज, दिल की बीमारी, अल्जाइमर आदि कई क्रॉनिक बीमारियां लग जाती हैं। बुजुर्गों में ब्लड प्रेशर की दिक्कत और रक्त प्रवाह में असंतुलन आदि भी हो जाता है। ऐसे में उनके लिए सुरक्षित योगासन का अभ्यास करके उनके शरीर को फिट रखा जा सकता है और एजिंग के साथ होने वाली बीमारियों से बचाव किया जा सकता है। योगासन करने से आपके फेफड़े सही रहते हैं

जॉगिंग करने से पहले वार्म-अप करे

हम जानते हैं कि किसी भी व्यायाम को करने से हमारे शरीर को गर्म करने की आवश्यकता होती है जिसे वार्म अप कहा जाता है। यह वार्म अप आपके शरीर को व्यायाम करने से लिए तैयार करता है। उसी प्रकार जॉगिंग के पहले वार्म अप करने से आपके पैरों की मांसपेशियों में लचीलापन आ जाता है जो जॉगिंग करने मदद करता हैं।

बुजुर्गों के लिए आसान योगासन त्रिकोणासन

त्रिकोणासन काफी प्रभावशाली और आसान योगासन है, जिसे बुजुर्ग आसानी से कर सकते हैं। बुजुर्गों के लिए योगासन में यह आसन इसलिए भी शामिल किया गया है, क्योंकि यह उनमें आमतौर पर होने वाली कूल्हों की दिक्कत और दर्द को दूर करने में मदद करता है। इसके अलावा, यह ब्लड प्रेशर को सामान्य रखता है। इसे करने के लिए अपने पैरों को कंधों के जितना खोलकर आराम से खड़े हो जाएं। अब दाएं पंजे को थोड़ा बाहर की तरफ ले जाएं और बाएं पंजे को अंदर की तरफ करें। अब दोनों हाथों को दोनों तरफ कंधे की सीध में फैला लें। इसके बाद गहरी सांस लें और फिर सांस बाहर छोड़ते हुए सिर और कमर को सामान्य रखते हुए कूल्हों की तरफ से दाई तरफ झुके

जाने जॉगिंग शुरू करने का सही तरीका

जॉगिंग कैसे करे: जॉगिंग दौड़ का ही एक रूप है जिसमें व्यक्ति धीमी गति से लगातार दौड़ता रहता है। आप जॉगिंग करके खुद को फिट रख सकते हैं। लेकिन जॉगिंग की शुरूआत करने के लिए पहले शरीर को इसके लिए तैयार कर लेना चाहिए कभी भी एकदम से जॉगिंग करने से बचना चाहिए। जॉगिंग शुरू करने से पहले पैदल चलें फिर उसके बाद जॉगिंग करें। नियमित रूप से व्यायाम आपको अनेक लाभों को देता है और जॉगिंग करना एक बहुत ही अच्छा व्यायाम है। वजन कम करने और फिट रहने के लिए जॉगिंग एक शानदार तरीका है। सप्ताह में तीन बार 30-40 मिनट तक जॉगिंग करना वसा कम करने के लिए साथ स्टेमिना बढ़ाने और मांसपेशियों के निर्माण का एक सरल और आसान तरीका

बुजुर्गों के लिए योगासन- शिशुआसन

शिशुआसन शरीर के नर्वस सिस्टम को आराम देता है और कमर की मसल्स को आराम पहुंचाता है, जिससे कमर दर्द में भी राहत मिलती है। इसे करने के लिए पैरों को मोड़कर अपनी एड़ियों के ऊपर बैठ जाएं। कोशिश करें कि आपके कूल्हे आपकी एड़ियों पर आराम से टिके हों। अब हाथ को सामने की तरफ फैलाते हुए सिर को सामने जमीन की तरफ ले जाएं। कोशिश करें कि जमीन पर सिर छूने लगे और हथेलियों को जमीन की तरफ रखें। अब इसी पोजीशन में रहें और धीरे-धीरे वापस वाली अवस्था में लौट जाएं।

आँखों की रोशनी तेज करने की एक्सरसाइज में 20-20-20 नियम को फॉलो करें

20-20-20 नियम उन लोगों के लिए बहुत ही फायदेमंद होता है जो लोग कंप्यूटर पर अधिक देर तक काम करते है। यह आँखों के तनाव को कम करने में मदद करता और उनको आराम देता है। डिजिटल आई स्ट्रेन को रोकने में यह नियम बहुत ही मददगार होता है।

20-20-20 नियम को कंप्यूटर चलाने के दौरान ही किया जाता है। इसमें आप 20 मिनट तक कंप्यूटर पर काम करे, फिर 20 सेकंड तक 20 फीट की दूर पर रखी वस्तु को देखें।

“योग विज्ञान है” – ओशो

 योग विज्ञान है, विश्वास नहीं। योग की अनुभूति के लिए किसी तरह की श्रद्धा आवश्यक नहीं है। योग का इस्लाम, हिंदू, जैन या ईसाई से कोई संबंध नहीं है। 

जिन्हें हम धर्म कहते हैं वे विश्वासों के साथी हैं। योग विश्वासों का नहीं है, जीवन सत्य की दिशा में किए गए वैज्ञानिक प्रयोगों की सूत्रवत प्रणाली है। इसलिए पहली बात मैं आपसे कहना चाहूंगा वह यह कि  योग विज्ञान है, विश्वास नहीं। योग की अनुभूति के लिए किसी तरह की श्रद्धा आवश्यक नहीं है। योग के प्रयोग के लिए किसी तरह के अंधेपन की कोई जरूरत नहीं है।

नास्तिक भी योग के प्रयोग में उसी तरह प्रवेश पा सकता है जैसे आस्तिक। योग नास्तिक-आस्तिक की भी चिंता नहीं करता है। विज्ञान आपकी धारणाओं पर निर्भर नहीं होता; विपरीत, विज्ञान के कारण आपको अपनी धारणाएं परिवर्तित करनी पड़ती हैं। कोई विज्ञान आपसे किसी प्रकार के बिलीफ, किसी तरह की मान्यता की अपेक्षा नहीं करता है। विज्ञान सिर्फ प्रयोग की, एक्सपेरिमेंट की अपेक्षा करता है।