अग्निसारा क्रिया


अग्निसार क्रिया प्राणायाम का एक प्रकार है। "अग्निसार क्रिया" से शरीर के अन्दर अग्नि उत्पन होती है, जो कि शरीर के अन्दर के रोगाणु को भस्म कर देती है। इसे प्लाविनी क्रिया भी कहते हैं।

शंख प्रक्षालन

प्राकृतिक चिकित्सा में आंतों एवं संपूर्ण शरीर में इकट्ठा विजातीय द्रव्य के निष्कासन के साथ-साथ बिगड़ी हुई पाचन प्रणाली को ठीक करने का सर्वोपरि स्थान है। यदि हम अपना खान-पान दुरुस्त रखें व पाचन प्रणाली संबंधी परेशानियों जैसे कब्ज आदि न होने दें तो हम जीवन पर्यन्त स्वस्थ रहेंगे। विजातीय द्रव्यों के निष्कासन एवं पाचन संबंधी परेशानियों को समूल नष्ट करने में प्राकृतिक चिकित्सा के अंतर्गत, यौगिक प्रक्रिया शंख प्रक्षालन का महत्वपूर्ण स्थान है। आंतों के शंख जैसे आकार एवं इसमें उपस्थित वायु की ओर संकेत करता है एवं 'प्रक्षालन' का अर्थ है पूर्ण सफा

“योग विज्ञान है” – ओशो

 योग विज्ञान है, विश्वास नहीं। योग की अनुभूति के लिए किसी तरह की श्रद्धा आवश्यक नहीं है। योग का इस्लाम, हिंदू, जैन या ईसाई से कोई संबंध नहीं है। 

जिन्हें हम धर्म कहते हैं वे विश्वासों के साथी हैं। योग विश्वासों का नहीं है, जीवन सत्य की दिशा में किए गए वैज्ञानिक प्रयोगों की सूत्रवत प्रणाली है। इसलिए पहली बात मैं आपसे कहना चाहूंगा वह यह कि  योग विज्ञान है, विश्वास नहीं। योग की अनुभूति के लिए किसी तरह की श्रद्धा आवश्यक नहीं है। योग के प्रयोग के लिए किसी तरह के अंधेपन की कोई जरूरत नहीं है।

नास्तिक भी योग के प्रयोग में उसी तरह प्रवेश पा सकता है जैसे आस्तिक। योग नास्तिक-आस्तिक की भी चिंता नहीं करता है। विज्ञान आपकी धारणाओं पर निर्भर नहीं होता; विपरीत, विज्ञान के कारण आपको अपनी धारणाएं परिवर्तित करनी पड़ती हैं। कोई विज्ञान आपसे किसी प्रकार के बिलीफ, किसी तरह की मान्यता की अपेक्षा नहीं करता है। विज्ञान सिर्फ प्रयोग की, एक्सपेरिमेंट की अपेक्षा करता है।