शुरुआती योगा अभ्यास दिन 17

यह शुरुआती योगा अभ्यास का दिन 17 है । यह सीरीज़ इस तरह से बनाया गया है कि कोई भी व्यक्ति योगा को आराम से समझ पाए और योग का लाभ उठा सके । इस वीडियो में मैंने समझाया गया है * सुखासन * गर्दन की स्ट्रेचिंग * बगल की स्ट्रेचिंग * सुप्त मत्स्येन्द्रासन * त्रिकोणासन * पार्श्व कोणासन * अधोमुख श्वानासन * श्वानासन * नाड़ी शुद्धि ========================== आप मुझसे इंस्टाग्राम पे कनेक्ट कर सकते हैं https://www.instagram.com/prakash.shristi/

माहवारी के लिए योग जानुशीर्षासन योग

जानुशीर्षासन योग मासिक धर्म की परेशानी और अनिद्रा से राहत दिलाने में मदद करता है। इसके अलावा जानुशीर्षासन मुद्रा मस्तिष्क को शांत करती है और हल्के अवसाद की चिंता, थकान, सिरदर्द को दूर करता है।

जानुशीर्षासन करने के लिए आप किसी साफ स्थान पर योगा मैट को बिछा के दोनों पैरों को सामने की ओर सीधा करके बैठ जाएं। अब अपने दाएं पैर को मोड़ के बाएं पैर की जांघ पर रखें। अपने दोनों हाथों को ऊपर की ओर करें सीधा खड़ा करें।
अब अपने ऊपर के शरीर को बाएं पैर की ओर नीचे झुकाएं और बाएं पैर के पंजें को पकड़ लें। अपने सिर को बाएं पैर के घुटने पर रख लें। इस मुद्रा में रहते हुये 5 से 10 बार साँस लें।

मासिक धर्म के लिए योग पश्चिमोत्तानासन

पश्चिमोत्तानासन योग महिला प्रजनन अंगों, खासकर गर्भाशय और अंडाशय को भी उत्तेजित करता है। जिससे प्रजनन स्तर में सुधार होता है और तनाव दूर होता है।

पश्चिमोत्तानासन करने के लिए आप किसी साफ स्थान पर योगा मैट को बिछा के दोनों पैरों को सामने की ओर सीधा करके दण्डासन में बैठ जाएं। अपने दोनों हाथों को ऊपर उठा के सीधे कर लें। अब धीरे-धीरे आगे की ओर झुके और अपने दोनों हाथों से पैर के पंजे पकड़ लें। अपनी सिर को घुटनों पर रख दें। इस आसन को 20 से 60 सेकंड के लिए करें।

पीरियड के लिए योग मलासन

मलासन योग अनियमित माहवारी और दर्द को कम करने में सहायक होता है। यह योग चयापचय में सुधार करने, पेट को टोन करने, पाचन तंत्र को सक्रिय करने, आपके कमर को मजबूत करने और आपके प्रजनन प्रणाली के लिए फायदेमंद होता है।

मलासन योग करने के लिए आप सबसे पहले सीधे खड़े हो जाएं और दोनों पैरों के मध्य 1 से 1.5 फिट की दूरी रखें। अब अपने दोनों हाथों को छाती के सामने जोड़ लें और धीरे-धीरे नीचें की ओर बैठ जाएं। अपनी जांघों को शरीर के ऊपरी हिस्से से अधिक चौड़ा रखें। दोनों हाथों को इस स्थिति में जोड़ें की कोहनी पर 90 डिग्री का एंगल बन जाएं। मलसाना योग में आप कम से कम एक मिनिट तक रहें।

मासिक धर्म के लिए योग भुजंगासन

कोबरा पोज या भुजंगासन योग महिलाओं के प्रजनन अंगों के लिए एक उत्कृष्ट योग आसन है। यह पाचन में भी सुधार करता है, आपकी छाती को खोलता है और रक्त परिसंचरण में सुधार करता है।

भुजंगासन योग को करने लिए आप एक योगा मैट को बिछा के उस पर पेट के बल लेट जाएं, जिसमें आपकी पीट ऊपर की ओर रहे। अपने दोनों हाथों को जमीन पर रखें। अब अपने दोनों हाथों पर वजन डालते हुयें धीरे-धीरे अपने सिर को पीछे के ओर करें और ठुड्डी को ऊपर की ओर करने का प्रयास करें। ध्यान रखें की आपके कमर से नीचे का शरीर जमीन से ऊपर ना उठे। आप इस आसन में 20 से 30 सेकंड तक रुकने का प्रयास करें।

माहवारी के लिए योग उष्ट्रासन

उष्ट्रासन योग महिलाओं के पीरियड्स को नियमित करने और मासिक धर्म के दर्द से राहत देने के लिए एक बेहतरीन योग है। यह कंधे और पीठ को भी मजबूत करता है, मुद्रा और लचीलेपन में सुधार करता है, आपके आंतरिक अंगों की मालिश करता है।

उष्ट्रासन योग को करने के लिए आप सबसे पहले एक योगा मैट को बिछा कर उस पर घुटनों के बल खड़े हो जाएं। अब अपनी कमर के यहाँ से पीछे की ओर झुके और अपने दोनों हाथों को पीछे ले जाएं। अपने सिर को पीछे झुका लें और दोनों हाथों को पैर की एड़ियों पर रखें। उष्ट्रासन की स्थिति में आप 30 से 60 सेकंड तक रुकने का प्रयास करें।

पीरियड के लिए योग बद्ध कोणासन

बद्ध कोणासन योग मासिक धर्म की समस्याओं के उपचार के लिए सबसे बेहतर आसन में से एक है। यह योग महिलाओं की प्रजनन प्रणाली में सुधार करता है। रक्त परिसंचरण में सुधार करने और गुर्दे तथा मूत्राशय को उत्तेजित करने में मदद करता है। बद्ध कोणासन प्रसव के लिए गर्भवती महिलाओं के लिए फायदेमंद है।

मासिक धर्म के लिए योग धनुरासन

धनुरासन योग करना महिलाओं के मासिक धर्म के लिए लाभदायक माना जाता है। यह आपके प्रजनन तंत्र के लिए सबसे अच्छे पोज़ में से एक है। यह एक मूल हठ योग आसन है जो पेट की चर्बी को कम करने, आपकी रीढ़ की हड्डी, जांघों और टखनों को मजबूत करने में फायदेमंद है।

पीरियड में कौन सा योग करना चाहिए

पीरियड में योग करना महिलाओं के लिए कई प्रकार से फायदेमंद होता है। अगर आप जानना चाहती है कि पीरियड में कौन सा योग करना चाहिए तो, आप मासिक धर्म के दौरान निम्न योग आसन को कर सकती हैं।

“योग विज्ञान है” – ओशो

 योग विज्ञान है, विश्वास नहीं। योग की अनुभूति के लिए किसी तरह की श्रद्धा आवश्यक नहीं है। योग का इस्लाम, हिंदू, जैन या ईसाई से कोई संबंध नहीं है। 

जिन्हें हम धर्म कहते हैं वे विश्वासों के साथी हैं। योग विश्वासों का नहीं है, जीवन सत्य की दिशा में किए गए वैज्ञानिक प्रयोगों की सूत्रवत प्रणाली है। इसलिए पहली बात मैं आपसे कहना चाहूंगा वह यह कि  योग विज्ञान है, विश्वास नहीं। योग की अनुभूति के लिए किसी तरह की श्रद्धा आवश्यक नहीं है। योग के प्रयोग के लिए किसी तरह के अंधेपन की कोई जरूरत नहीं है।

नास्तिक भी योग के प्रयोग में उसी तरह प्रवेश पा सकता है जैसे आस्तिक। योग नास्तिक-आस्तिक की भी चिंता नहीं करता है। विज्ञान आपकी धारणाओं पर निर्भर नहीं होता; विपरीत, विज्ञान के कारण आपको अपनी धारणाएं परिवर्तित करनी पड़ती हैं। कोई विज्ञान आपसे किसी प्रकार के बिलीफ, किसी तरह की मान्यता की अपेक्षा नहीं करता है। विज्ञान सिर्फ प्रयोग की, एक्सपेरिमेंट की अपेक्षा करता है।