पादहस्तासन के फायदे

यह आसन शरीर को बेहद लचीला(flexible) और फुर्तीला बनाने में मदद करता है। यह पूरी तरह से पीठ और पैरों की मांसपेशियों को खींचता है। रीढ़ की हड्डी भी लचीली होती है और नसों को टोन करने का काम करता है।

पादहस्तासन एक ऐसा आसन है जो पेट के आसपास के क्षेत्र को टोन (tone) करता है और बेली फैट (belly fat)अर्थात् पेट की चर्बी को दूर करता है।

यह आसन करने से पेट के अंगों का मसाज हो जाता है जिससे पाचन क्रिया बेहतर होती है और कब्ज समाप्त हो जाता है। इसके अलावा यह पेट की बीमारियों को दूर रखता है।

पादहस्तासन करने का तरीका

  • दोनों पैरों के बीच बराबर दूरी बनाकर जमीन पर बिल्कुल सीधे खड़े हो जाएं।
  • धीरे से श्वास लेते हुए अपने दोनों हाथों को अपने सिर के ऊपर तक उठाएं।
  • अब श्वास छोड़ते हुए धीरे से अपने शरीर को आगे की ओर झुकाएं। आपकी हथेलियां(palms) पैरों को छूनी चाहिए और नाक एवं माथा आपके घुटनों(knees) को छूना चाहिए।
  • अब जितने देर तक संभव हो इस मुद्रा में बने रहें।
  • इसके बाद श्वास लेते हुए फिर से सीधे खड़े हो जाएं।
  • इस योग मुद्रा को 3 से 5 बार तक दोहराएं।

पादहस्तासन पेट को फ्लेट करने के लिए

शिल्पा शेट्टी योगा में इसको पेट की चर्बी को कम करने के लिए किया जाता है इस योग का नाम पादहस्तासन संस्कृत का शब्द है, जहां पाद का अर्थ पैर(foot) हस्त का अर्थ हाथ(hands) और आसन का अर्थ (pose) है। शिल्पा शेट्टी के सभी आसनों में से वजन घटाने के लिए यह एक लोकप्रिय आसन है। इस आसन कोलेस्ट्रॉल और ब्लड प्रेशर की समस्या को दूर करता है।

शिल्पा शेट्टी योगा इन हिंदी

आइये जानते है बॉलीवुड की सबसे फिट बॉडी वाली हीरोइन को, जो एक माँ होने के बाद भी अपने शरीर को योग के माध्यम से फिट रखती है।

शिल्पा शेट्टी योगा पेट को फ्लेट करने और अच्छे स्वास्थ्य के लिए

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योग के फायदे

शरीर की तमाम बीमारियों को दूर करने का योग एक प्राकृतिक तरीका है। यह सिर्फ मन को खुशहाल एवं मस्तिष्क को शांत ही नहीं रखता है बल्कि विकारों को दूर करने एवं शरीर को स्वस्थ (healthy) बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस मनाने का उद्देश्य

योग दिवस मनाने का मुख्य उद्देश्य भारत के प्राचीन योगाभ्यास को नयी पीढ़ी के युवाओं (youth) के बीच लोकप्रिय बनाना एवं योग के फायदों के बारे में जागरूक करना है। माना जाता है कि योग के दैनिक अभ्यास से शारीरिक बीमारियां एवं मानसिक तनाव दूर हो जाते हैं।

युवाओं के बीच योग एवं ध्यान(meditation) को विकसित करना है जिससे वे जागरूक होकर योग एवं ध्यान के जरिए मानसिक शांति हासिल कर सकें। ध्यान तनाव को दूर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है एवं योग तन और मन को स्वस्थ रखता है।

योग का इतिहास

भारत में योग का इतिहास लगभग 5000 साल पुराना है और मानसिक, शारीरिक एवं आध्यात्म के रूप में लोग प्राचीन काल से ही इसका अभ्यास करते आ रहे हैं। योग की उत्पत्ति सर्वप्रथम भारत में ही हुई इसके बाद यह दुनिया के अन्य देशों में लोकप्रिय हुआ। प्राचीन काल में यहां लोग मस्तिष्क की शांति के लिए ध्यान करते थे। योग की उत्पत्ति भगवान शिव से हुई है जिन्हें आदि योगी के नाम से भी जाना जाता है। भगवान शिव को दुनियाभर के योगियों का गुरू माना जाता है। इसके बाद ऋषि-मुनियों से योग को लोकप्रिय बनाया और योग ने दुनिया भर में ख्याति अर्जित की। आज सूर्य नमस्कार (sun salutation), अनुलोम-विलोम सहित कई योगासन एवं ध्यान का

“योग विज्ञान है” – ओशो

 योग विज्ञान है, विश्वास नहीं। योग की अनुभूति के लिए किसी तरह की श्रद्धा आवश्यक नहीं है। योग का इस्लाम, हिंदू, जैन या ईसाई से कोई संबंध नहीं है। 

जिन्हें हम धर्म कहते हैं वे विश्वासों के साथी हैं। योग विश्वासों का नहीं है, जीवन सत्य की दिशा में किए गए वैज्ञानिक प्रयोगों की सूत्रवत प्रणाली है। इसलिए पहली बात मैं आपसे कहना चाहूंगा वह यह कि  योग विज्ञान है, विश्वास नहीं। योग की अनुभूति के लिए किसी तरह की श्रद्धा आवश्यक नहीं है। योग के प्रयोग के लिए किसी तरह के अंधेपन की कोई जरूरत नहीं है।

नास्तिक भी योग के प्रयोग में उसी तरह प्रवेश पा सकता है जैसे आस्तिक। योग नास्तिक-आस्तिक की भी चिंता नहीं करता है। विज्ञान आपकी धारणाओं पर निर्भर नहीं होता; विपरीत, विज्ञान के कारण आपको अपनी धारणाएं परिवर्तित करनी पड़ती हैं। कोई विज्ञान आपसे किसी प्रकार के बिलीफ, किसी तरह की मान्यता की अपेक्षा नहीं करता है। विज्ञान सिर्फ प्रयोग की, एक्सपेरिमेंट की अपेक्षा करता है।