स्वस्थ हृदय के लिए योग भुजंगासन

अपने दिल को स्वस्थ रखने के लिए और इसे बीमारियों से बचने के लिए भुजंगासन बहुत ही लाभदायक योग आसन है।

भुजंगासन योग को करने लिए आप एक योगा मैट को बिछा के उस पर पेट के बल लेट जाएं जिसमे आपकी पीट ऊपर की ओर रहे।
अपने दोनों हाथों को जमीन पर रखें। अब अपने दोनों हाथों पर वजन डालते हुये धीरे-धीरे अपने सिर को पीछे के ओर करें और ठुड्डी को ऊपर की ओर करने का प्रयास करें।
आप इस भुजंगासन योग में 20 से 30 सेकंड तक रुकने का प्रयास करें।
 

हार्ट अटैक रोगी करें जानुशीर्षासन योग

जानुशीर्षासन योग करना हार्ट अटैक रोगियों के लिए अच्छा माना जाता है। इसके अलावा जानुशीर्षासन मुद्रा मस्तिष्क को शांत करती है और हल्के अवसाद की चिंता, थकान, सिरदर्द, मासिक धर्म की परेशानी और अनिद्रा से राहत दिलाने में मदद करती है।

सुखासन योग फॉर हार्ट पेशेंट्स

हार्ट अटैक का एक कारण मानसिक तनाव भी हो सकता है। सुखासन योग मानसिक तनाव को कम करता है। यदि आप एक हार्ट पेशेंट्स तो आपके लिए सुखासन योग करना फ़ायदेमंद हो सकता है।

इस आसन को करने के लिए आप एक योगा मैट को जमीन पर बिछा के बैठ जाएं, अपने पैरों को घुटने के यहाँ से मोड़ लें, इसमें एक पैर बाहर की ओर तथा दूसरा पैर अन्दर के ओर रहता हैं।
अपनी रीढ़ की हड्डी को सीधा रखें और दोनों हाथों को सीधा करके अपने घुटनों पर रख लें।
अब आँखों को बंद करके ध्यान करें। इस आसन में आप अपनी इच्छा के अनुसार रह सकते हैं।
 

हार्ट अटैक से बचने के लिए योग वृक्षासन

दिल का दौरा पड़ने से बचाने में वृक्षासन योग आपकी मदद कर सकता है। हार्ट अटैक से बचने के लिए ट्री पोज बहुत ही अच्छा माना जाता है। वृक्षासन में व्यक्ति की स्थिति एक वृक्ष के सामान दिखाई देती है।

हार्ट अटैक से बचाए त्रिकोणासन योग

जो व्यक्ति त्रिकोणासन योग करते है उन लोगों को हार्ट अटैक की संभावना कम होती है। त्रिकोणासन योग करने से हमारे हृदय में पर्याप्त मात्रा में रक्त और ऑक्सीजन को ले जाने में मदद करता है। त्रिकोणासन को करने वाले व्यक्ति की स्थिति एक त्रिकोण के समान दिखाई देती हैं। यह आसन दिल से संबंधित सभी प्रकार की समस्या को दूर करने में मदद करता है। यह आसन पैरों को मजबूत करने और पूरे शरीर को स्वस्थ रखने में मदद करता हैं।

“योग विज्ञान है” – ओशो

 योग विज्ञान है, विश्वास नहीं। योग की अनुभूति के लिए किसी तरह की श्रद्धा आवश्यक नहीं है। योग का इस्लाम, हिंदू, जैन या ईसाई से कोई संबंध नहीं है। 

जिन्हें हम धर्म कहते हैं वे विश्वासों के साथी हैं। योग विश्वासों का नहीं है, जीवन सत्य की दिशा में किए गए वैज्ञानिक प्रयोगों की सूत्रवत प्रणाली है। इसलिए पहली बात मैं आपसे कहना चाहूंगा वह यह कि  योग विज्ञान है, विश्वास नहीं। योग की अनुभूति के लिए किसी तरह की श्रद्धा आवश्यक नहीं है। योग के प्रयोग के लिए किसी तरह के अंधेपन की कोई जरूरत नहीं है।

नास्तिक भी योग के प्रयोग में उसी तरह प्रवेश पा सकता है जैसे आस्तिक। योग नास्तिक-आस्तिक की भी चिंता नहीं करता है। विज्ञान आपकी धारणाओं पर निर्भर नहीं होता; विपरीत, विज्ञान के कारण आपको अपनी धारणाएं परिवर्तित करनी पड़ती हैं। कोई विज्ञान आपसे किसी प्रकार के बिलीफ, किसी तरह की मान्यता की अपेक्षा नहीं करता है। विज्ञान सिर्फ प्रयोग की, एक्सपेरिमेंट की अपेक्षा करता है।