उत्तानपादासन के लाभ पेट की मांसपेशियों को मजबूत करे
उत्तानपादासन पेट की मांसपेशियों को मजबूत करता हैं। यह आसन आपके पेट की चर्बी को खत्म कर देता हैं, दोनों पैरों को ऊपर करने से पेट की मांसपेशियों पर दबाव पड़ता हैं, यह पेट के 6 पैक बनाने के लिए उत्कृष्ट योग होता हैं।
उत्तानपादासन के फायदे से कमर दर्द ठीक करें
अगर आप कमर दर्द से परेशान हैं तो यह आसन आपके लिए लाभकारी हो सकता हैं, इस आसन में कमर के बल लेट के दोनों पैरों को ऊपर उठान पड़ता हैं इसमें आपकी कमर बिलकुल सीधी रहती हैं, पहले तो इस आसन से कमर दर्द होगा पर नियमित अभ्यास से आपके कमर दर्द को आराम मिलेगा, उत्तानपादासन हैमस्ट्रिंग मांसपेशियों को भी मजबूत करता है।
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वजन को कम करने के लिए करें उत्तानपादासन
उत्तानपादासन पेट की अम्लता, अपचन, और कब्ज जैसे पेट विकारों का इलाज करता है, अगर आप पर के मोटापे और भारी वजन से परेशान हैं तो उत्तानपादासन योग आपके फायदेमंद हो सकता हैं। इस आसन के नियमित अभ्यास से आप कुछ ही दिनों में अपने भारी पेट को कम कर सकते हैं और एक स्लिम पेट का आनंद उठा सकते हैं। उत्तानपादासन पेट की चर्बी कम करने और पेट को अंदर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
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उत्तानपादासन के फायदे
हर दिन उत्तानपादासन योग करने के अनेक लाभ हैं, आइये इसके लाभों को विस्तार से जानते हैं-
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उत्तानपादासन करने की विधि
हम सभी के लिए उत्तानपादासन योग करने के अनेक लाभ हैं, आइये इसे करने के तरीके को विस्तार से स्टेप बाय स्टेप जानते हैं-
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उत्तानपादासन योग क्या है
उत्तानपादासन नाम संस्कृत से लिया गया हैं, उत्तानपादासन मुद्रा का नाम दो शब्दों “उत्तान” और “पाद” से मिलकर बना हैं, जिसमे “उत्तान” शब्द का अर्थ ऊपर उठा हुआ और “पाद” शब्द का अर्थ पैर होता हैं। पीठ के बल लेट कर यह आसन किया जाता हैं इसलिए इसे उत्तानपादासन नाम दिया गया हैं, यह पेट की मांसपेशियों को मजबूत करने के लिए अच्छा है। इसे द्विपादासन के नाम से भी जाना जाता हैं, द्विपादासन में “द्वि” अर्थात दोनों का खड़ा होना और “पदा” का अर्थ हैं पैर, इसका पूरा अर्थ दोनों पैरो का खड़ा होना। आइये हम उत्तानपादासन करने का तरीका और उसके फायदे के बारे में जानते हैं।
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उत्तानपादासन करने की विधि और फायदे
योग की अनेक मुद्रा होती हैं उन्ही में से उत्तानपादासन योग भी एक प्रमुख आसन हैं, पेट कम करने के लिये उत्तानपादासन करने की सलाह दी जाती हैं। इस योग से आपको पेट से सम्बंधित किसी भी प्रकार की बीमारी नहीं होगी और आप हमेशा स्वस्थ रहेगें। यह एक क्लासिक मुद्रा है जो सुपिन की स्थिति में की जाती है। एक फ्लैट पेट और मजबूत एब्स के लिए लोग इसे पसंद करते हैं। नीचे उत्तानपादासन करने की विधि और उत्तानपादासन के फायदे दिये जा रहे हैं जिसे पढ़कर आप आसानी से इसे घर पर इसे कर सकते हैं
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Pectoral Stretch
पद्मासन करते समय सावधानियां
आमतौर पर पद्मासन बहुत सरल आसन है लेकिन यदि शरीर में कोई विशेष बीमारी या तकलीफ हो तो इस आसन को करने से पहले कुछ सावधानियां बरतनी चाहिए।
अगर आपके पैरों के घुटनों में चोट लगी हो और घुटनों को मोड़ने में कठिनाई महसूस हो रही हो तो जबरदस्ती इसे मोड़ने की कोशिश न करें।
ज्यादातर लोग दूसरे पैर को पहले पैर की जांघ पर आसानी से नहीं रख पाते हैं। इसलिए ऐसे लोगों को पहले अर्ध तितली आसन (Half Butterfly Pose) करने का अभ्यास करना चाहिए, इसके बाद पद्मासन का अभ्यास करना चाहिए।
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पाचन क्रिया सुधारने में पद्मासन योग के लाभ
पद्मासन (Lotus Pose) करने से पेट के आसपास के हिस्सों का अच्छे से मसाज हो जाता है जिससे पेट की तरफ रक्त का प्रवाह बेहतर होता है। ब्लड सर्कुलेशन बढ़ने के साथ ही यह आसन करने से पाचन क्रिया बेहतर होती है।
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“योग विज्ञान है” – ओशो
योग विज्ञान है, विश्वास नहीं। योग की अनुभूति के लिए किसी तरह की श्रद्धा आवश्यक नहीं है। योग का इस्लाम, हिंदू, जैन या ईसाई से कोई संबंध नहीं है।
जिन्हें हम धर्म कहते हैं वे विश्वासों के साथी हैं। योग विश्वासों का नहीं है, जीवन सत्य की दिशा में किए गए वैज्ञानिक प्रयोगों की सूत्रवत प्रणाली है। इसलिए पहली बात मैं आपसे कहना चाहूंगा वह यह कि योग विज्ञान है, विश्वास नहीं। योग की अनुभूति के लिए किसी तरह की श्रद्धा आवश्यक नहीं है। योग के प्रयोग के लिए किसी तरह के अंधेपन की कोई जरूरत नहीं है।
नास्तिक भी योग के प्रयोग में उसी तरह प्रवेश पा सकता है जैसे आस्तिक। योग नास्तिक-आस्तिक की भी चिंता नहीं करता है। विज्ञान आपकी धारणाओं पर निर्भर नहीं होता; विपरीत, विज्ञान के कारण आपको अपनी धारणाएं परिवर्तित करनी पड़ती हैं। कोई विज्ञान आपसे किसी प्रकार के बिलीफ, किसी तरह की मान्यता की अपेक्षा नहीं करता है। विज्ञान सिर्फ प्रयोग की, एक्सपेरिमेंट की अपेक्षा करता है।