हार्ट ब्लॉकेज नेचुरली ठीक करे त्रिकोणासन योग

त्रिकोणासन योग हार्ट ब्लॉकेज नेचुरली ठीक करने में सहायक होता है। त्रिकोणासन योग इस आसन को करने के लिए आप एक योगा मैट पर दोनों पैरों को दूर-दूर करके सीधे खड़े हो जाएं, अपने दाएं पैर के साइड झुकें और अपने हाथ को जमीन पर रखें और दूसरे हाथ को ऊपर करके सीधा करें जिससे दोनों हाथ एक सीधी रेखा में हो जाएं। कुछ देर इस आसन में रहें, अगर आपको जमीन पर हाथ रखने में कठिनाई होती हैं तो आप हाथ को पैर के ऊपर रख सकते हैं।

हार्ट ब्लॉकेज के लिए योग गोमुखासन

आप हार्ट ब्लॉकेज को नेचुअली दूर करने के लिए गोमुखासन योग कर सकते है। गोमुखासन योग को करने के लिए आप आप एक योगा मैट बिछा के सुखासन में बैठ जाएं। अपने दाएं पैर को खिंच के अपने शरीर के पास लाएं फिर अपने बाएं पैर को भी खिंच के दाएं पैर की जांघ के ऊपर से अपने पास लाएं। अब अपने दाएं हाथ को कंधे के ऊपर से पीठ पर ले जाएं और बाएं हाथ को कोहनी के यह से मोड़ें के पीठ के पीछे ले जाये और अपने दोनों हाथों को आपस में मिला लें। आप इस स्थिति में कुछ समय तक रहें।

अर्ध मत्स्येन्द्रासन योग करने के फायदे हार्ट ब्लॉकेज में

हार्ट ब्लॉकेज को ठीक करने के लिए आप अर्ध मत्स्येन्द्रासन योग करें। यह ख़राब कोलेस्ट्रॉल को कम करने में मदद करता है। अर्ध मत्स्येन्द्रासन योग को करने के लिए आप सबसे पहले एक योगा मैट को बिछा के उस पर दण्डासन में बैठ जाएं। अपने दायं पैर को बाएं पैर के घुटने के साइड में बाहर की ओर रखें। रीढ़ की हड्डी को सीधा रखें अपने गर्दन कंधे और कमर को दाहिनी ओर घुमा लें। कुछ सेकंड के लिए इस मुद्रा में रहे और फिर यही पूरी प्रक्रिया दूसरे पैर से करें।

हार्ट ब्लॉकेज के लिए योग धनुरासन

धनुरासन योग हार्ट ब्लॉकेज को ठीक करने में मदद करता है। यह आपके कोलेस्ट्रॉल के स्तर को नियंत्रण में लाने में मदद करता है। धनुरासन योग को करने के लिए एक योगा मैट को जमीन पर बिछा के उस पर पेट के बल लेट जाएं। अब अपने दोनों हाथों को शरीर के समांतर रखें, अब अपने दोनों पैरों को पीछे की ओर घुटनों के यहाँ से मोड़े। अपने हाथों को पीछे की ओर ले जाएं और दोनों पैरों को दोनों हाथों से पकड़ लें। इस आसन में कम से कम 20 से 30 सेकंड तक रुकने का प्रयास करें। अंत में दोनों हाथों को खोल के अपनी प्रारंभिक स्थिति में आयें।

हार्ट ब्लॉकेज के लिए योग

हार्ट ब्लॉकेज के लिए योग करना बहुत ही फायदेमंद होता है। योग के दौरान गहरी और लंबी साँस लेना आपको सभी प्रकार के हृदय रोगों से दूर रखता है। हार्ट ब्लॉकेज का मुख्य कारण खराब कोलेस्ट्रॉल का बॉडी में अधिक होना है।

OSHO: I Am Ignorant

For years Osho has spoken to a worldwide audience on timeless issues such as meditation, freedom, love, happiness, and enlightenment. In these talks, the human mind is put under the microscope as never before, analyzed to the smallest wrinkle. In the process Osho exposes hypocrisy and humbug wherever he sees it.

शुरुआती योगा अभ्यास दिन 15

यह शुरुआती योगा अभ्यास का दिन 15 है । यह सीरीज़ इस तरह से बनाया गया है कि कोई भी व्यक्ति योगा को आराम से समझ पाए और योग का लाभ उठा सके । इस वीडियो में मैंने समझाया गया है * सुखासन * बद्धकोणासन * जानुशीर्षासन * पश्चिमोत्तानासन * उत्तानासन * मरीच्यासन * शवासन * भस्त्रिका ========================== आप मुझसे इंस्टाग्राम पे कनेक्ट कर सकते हैं https://www.instagram.com/prakash.shristi/

मन को शांत करने के लिए मेडिटेशन करें

चिंता मुक्त रहने के लिए मेडिटेशन करना सबसे अच्छा और प्रभावी तरीका है। यह मेडिटेशन योग दिमाग में चल रही उथल पुथल को शांत करके दिमाग को आराम देता है। मेडिटेशन करने के लिए आप सबसे पहले एक योगा मैट को जमीन पर बिछा कर पद्मासन या सुखासन में बैठ जाएं। अब गहरी लंबी साँस लें और छोड़ें। इसे योग को आप अपनी क्षमता के अनुसार कर सकते है।

शवासन योग से शांत करें भावनात्मक उथल-पुथल को

शवासन योग आसान को आराम की मुद्रा कहा जाता है, क्योंकि इसे सभी योग आसान को करने के बाद में किया जाता है। मन को शांत और प्रसन्न रखने में शवासन योग आपकी मदद कर सकता है। टेंशन को दूर करने के लिए शवासन योग आसन एक बहुत ही अच्छा माध्यम है।

“योग विज्ञान है” – ओशो

 योग विज्ञान है, विश्वास नहीं। योग की अनुभूति के लिए किसी तरह की श्रद्धा आवश्यक नहीं है। योग का इस्लाम, हिंदू, जैन या ईसाई से कोई संबंध नहीं है। 

जिन्हें हम धर्म कहते हैं वे विश्वासों के साथी हैं। योग विश्वासों का नहीं है, जीवन सत्य की दिशा में किए गए वैज्ञानिक प्रयोगों की सूत्रवत प्रणाली है। इसलिए पहली बात मैं आपसे कहना चाहूंगा वह यह कि  योग विज्ञान है, विश्वास नहीं। योग की अनुभूति के लिए किसी तरह की श्रद्धा आवश्यक नहीं है। योग के प्रयोग के लिए किसी तरह के अंधेपन की कोई जरूरत नहीं है।

नास्तिक भी योग के प्रयोग में उसी तरह प्रवेश पा सकता है जैसे आस्तिक। योग नास्तिक-आस्तिक की भी चिंता नहीं करता है। विज्ञान आपकी धारणाओं पर निर्भर नहीं होता; विपरीत, विज्ञान के कारण आपको अपनी धारणाएं परिवर्तित करनी पड़ती हैं। कोई विज्ञान आपसे किसी प्रकार के बिलीफ, किसी तरह की मान्यता की अपेक्षा नहीं करता है। विज्ञान सिर्फ प्रयोग की, एक्सपेरिमेंट की अपेक्षा करता है।