યોગ નો ઉદ્દેશ અને યોગાસન ના લાભ

વાચકમિત્રો, આધુનિક યુગમાં યોગ ખૂબ જ પ્રચલિત થયેલ છે અને માત્ર ભારતમાં જ નહીં, બલકે દુનિયાભરમાં યોગ શીખવતાં કલાસીસ ખૂલી ગયા છે. પરંતુ ખેદની વાત એ છે કે યોગ અંગેની વિવિધ ભ્રામક માન્યતાઓ વધુ પ્રચલિત થઈ છે. ૨૧ જૂનનો દિવસ એ વિશ્વ યોગ દિન તરીકે ઉજવાઈ રહ્યો છે એ નિમિત્તે આજે આપણે યોગ વિષે થોડી વિસ્તૃત ચર્ચા કરીએ અને તે અંગે સાચી માહિતી પ્રાપ્ત કરીએ.

सेहत और योग

योग शरीर को सेहतमंद बनाए रखता है और कई प्रकार की शरीरिक और मानसिक परेशानियों को दूर करता है. योग श्वसन क्रियाओं को सुचारू बनाता है. योग के दौरान गहरी सांस लेने से शरीर तनाव मुक्त होता है. योग से रक्त संचार भी सुचारू होता है और शरीर से हानिकारक टाँक्सिन निकल आते हैं. यह थकान, सिरदर्द, जोड़ों के दर्द से राहत दिलाता है एवं ब्लड प्रेसर को सामान्य बनाए रखने में भी सहायक होता है.

“योग विज्ञान है” – ओशो

 योग विज्ञान है, विश्वास नहीं। योग की अनुभूति के लिए किसी तरह की श्रद्धा आवश्यक नहीं है। योग का इस्लाम, हिंदू, जैन या ईसाई से कोई संबंध नहीं है। 

जिन्हें हम धर्म कहते हैं वे विश्वासों के साथी हैं। योग विश्वासों का नहीं है, जीवन सत्य की दिशा में किए गए वैज्ञानिक प्रयोगों की सूत्रवत प्रणाली है। इसलिए पहली बात मैं आपसे कहना चाहूंगा वह यह कि  योग विज्ञान है, विश्वास नहीं। योग की अनुभूति के लिए किसी तरह की श्रद्धा आवश्यक नहीं है। योग के प्रयोग के लिए किसी तरह के अंधेपन की कोई जरूरत नहीं है।

नास्तिक भी योग के प्रयोग में उसी तरह प्रवेश पा सकता है जैसे आस्तिक। योग नास्तिक-आस्तिक की भी चिंता नहीं करता है। विज्ञान आपकी धारणाओं पर निर्भर नहीं होता; विपरीत, विज्ञान के कारण आपको अपनी धारणाएं परिवर्तित करनी पड़ती हैं। कोई विज्ञान आपसे किसी प्रकार के बिलीफ, किसी तरह की मान्यता की अपेक्षा नहीं करता है। विज्ञान सिर्फ प्रयोग की, एक्सपेरिमेंट की अपेक्षा करता है।