अनंतासन योग के लाभ

विष्णु आसन या अनंतासन योग करने के अनेक लाभ हैं यह हमारे शरीर के विभिन्न प्रकार के रोगों को दूर करने में मदद करता हैं आइये इसके फायदों को विस्तार से जानते हैं-

अनंतासन योग करने का तरीका

विष्णु आसन या अनंतासन योग आसन करने के लिए आपको नीचे कुछ स्टेप्स दी जा रही हैं जिसकी सहायता से आप इस आसन को आसानी से कर सकते हैं।

अनंतासन योग करने से पहले करें यह आसन

अनंतासन योग आसन करने से पहले आप नीचे दिए गए कुछ योग आसन का अभ्यास करें जिससे आपको इस आसन को करने में आसानी होगी-

त्रिकोणासन
अधोमुख श्वान आसन
सुप्तपदांगुष्ठासन
उत्तानपादासन
 

अनंतासन योग क्या हैं

अनंतासन को योग श्रंखला का सबसे अच्छा योग आसन माना जाता है। अनंतासन एक संस्कृत भाषा का शब्द है जो शब्दों से मिलकर बना है जिसका पहला शब्द “अनंत” है जिसका अर्थ “असीम” होता है और दूसरा शब्द “आसन” है जिसका अर्थ “पोज़” या “मुद्रा” होता है। अनंतासन योग को विष्णु आसन भी कहा जाता है। अनंत भगवान विष्णु के कई प्रसिद्ध नामो में से एक हैं। जब आप अनंतासन करते हैं तो आपका शरीर भगवान विष्णु के आराम मुद्रा जैसा दिखता है। हिन्दू धर्म के अनुसार 1000 सिर वाले नाग को “अनंत” के रूप में भी जाना जाता है, जो विष्णु भगवान की शयन शय्या है। अनंतासन योग को अंग्रेजी में स्लीपिंग विष्णु पोज़ (Sleeping Vishnu Pose), इटरनल

अनंतासन योग करने के करने के तरीके और उनके फायदे

नंतासन एक महत्वपूर्ण योग आसन है। इस आसन को विष्णु आसन भी कहा जाता है क्योंकि यह भगवान विष्णु के नाम पर रखा गया हैं। अनंतासन योग करना हमारे शरीर के लिए बहुत ही लाभदायक होता है। इस योग आसन को करने से पूरे शरीर में रक्त का परिसंचरण अच्छी तरह से होता हैं। यह योग पेल्विक मांसपेशियों को बेहतर करता है और प्रोस्टेट ग्रंथि के कार्य को भी बढ़ावा देता हैं। आइये अनंतासन योग को करने की विधि और उससे होने होने वाले लाभों को विस्तार से जानते हैं।

लिंग मुद्रा योग करने के फायदे प्रतिरक्षा प्रणाली के लिए

वातावरण में बदलाव के कारण सर्दी खांसी एवं बुखार जैसी बीमारियां होना आम बात है। माना जाता है कि लिंग मुद्रा करने से प्रतिरक्षा प्रणाली मजबूत होती है जिसके कारण मौसम संबंधी समस्याएं नहीं होती है। इस मुद्रा को नियमित रुप से करने से यह कफ या बलगम नहीं बनने देता है और फेफड़ों को भी मजबूत रखता है। यही कारण है कि सेहत के लिए लिंग मुद्रा फायदेमंद है।

“योग विज्ञान है” – ओशो

 योग विज्ञान है, विश्वास नहीं। योग की अनुभूति के लिए किसी तरह की श्रद्धा आवश्यक नहीं है। योग का इस्लाम, हिंदू, जैन या ईसाई से कोई संबंध नहीं है। 

जिन्हें हम धर्म कहते हैं वे विश्वासों के साथी हैं। योग विश्वासों का नहीं है, जीवन सत्य की दिशा में किए गए वैज्ञानिक प्रयोगों की सूत्रवत प्रणाली है। इसलिए पहली बात मैं आपसे कहना चाहूंगा वह यह कि  योग विज्ञान है, विश्वास नहीं। योग की अनुभूति के लिए किसी तरह की श्रद्धा आवश्यक नहीं है। योग के प्रयोग के लिए किसी तरह के अंधेपन की कोई जरूरत नहीं है।

नास्तिक भी योग के प्रयोग में उसी तरह प्रवेश पा सकता है जैसे आस्तिक। योग नास्तिक-आस्तिक की भी चिंता नहीं करता है। विज्ञान आपकी धारणाओं पर निर्भर नहीं होता; विपरीत, विज्ञान के कारण आपको अपनी धारणाएं परिवर्तित करनी पड़ती हैं। कोई विज्ञान आपसे किसी प्रकार के बिलीफ, किसी तरह की मान्यता की अपेक्षा नहीं करता है। विज्ञान सिर्फ प्रयोग की, एक्सपेरिमेंट की अपेक्षा करता है।