शुरुआती योगा अभ्यास दिन 18

यह शुरुआती योगा अभ्यास का दिन 18 है । यह सीरीज़ इस तरह से बनाया गया है कि कोई भी व्यक्ति योगा को आराम से समझ पाए और योग का लाभ उठा सके । इस वीडियो में मैंने समझाया गया है * सुखासन * बद्धकोणासन * पवनमुक्तासन * अर्ध बालासन * बालासन * मुक्त हस्त पदासन * दंडासन * पश्चिमोत्तानासन * श्वानासन * नाड़ी शुद्धि ========================== आप मुझसे इंस्टाग्राम पे कनेक्ट कर सकते हैं https://www.instagram.com/prakash.shristi/

तितली आसन करने के फायदे वजाइना टाइट करने में

योनि को टाइट करने के लिए तितली योग बहुत फायदेमंद माना जाता है। तितली आसन या बटरफ्लाई पोज़ करने के लिए फर्श पर सीधे बैठ जाएं। अब घुटनों को मोड़ें और दोनों पैरों को पेल्विक फ्लोर की ओर लाएँ, और फिर पाँव के तलवे एक दुसरे को छुएं। दोनों हाथों से अपने दोनों पाँव को कस कर पकड़ लें। एड़ी को जननांगों के जितना करीब हो सके लाने का प्रयास करें। अब तितली के पंखों की तरह दोनों पैरों को ऊपर नीचे हिलाना शुरू करें। महिलाएं अपनी क्षमता के अनुसार इस योग को करें।

योनि को टाइट करने के लिए योग सुप्त वज्रासन

योनि में ढीलेपन से छुटकारा पाने के लिए आप सुप्त वज्रासन योग का सहारा ले सकतीं हैं। यह योग वेजाइनल मसल्स को टाइट करने में मददगार होता है।

सुप्त वज्रासन करने के लिए आप सबसे पहले किसी साफ स्थान पर योगा मेट को बिछा कर घुटने टेक कर बैठ जाएं। अब दोनों हाथों को पीछे की ओर ले जाएं और कोहनी को जमीन पर रख लें। हाथों की कोहनी पर शरीर का थोड़ा से भार डालते हुए अपने ऊपर के शरीर को पीछे की ओर झुकाएं और पीठ को पूरी तरह से फर्श पर रखें। अब अपने दोनों हाथों को सीधा करके अपनी दोनों जांघों पर रख लें। आप सुप्त वज्रासन के 3 से 5 सेट्स कर सकती हैं।

चक्रासन योग करने के फायदे योनि कसने में

पेल्विक फ्लोर की मसल्स को टाइट करने के लिए चक्रासन योग करना बहुत ही अच्छा माना जाता है। चक्रासन योग इसके लिए आप योगा मैट पर सीधे खड़े हो जाएं और अपने दोनों हाथों को ऊपर की ओर सीधा खड़े करें। अब अपने हाथों को पीछे की ओर अपने सिर के पास ले जाके जमीन से टिका लें। अब अपने हाथों और पैरों पर वजन को डालते हुयें कधों और कूल्हों को ऊपर उठायें। इसके बाद अपने दोनों हाथों को अपने दोनों पैरों के पास लाने की कोशिश करें और जितने पास ला सकते लाएं। चक्रासन योग में कम से कम 15 से 20 के लिए रुकें।

वजाइना टाइट करने के लिए योग धनुरासन

महिलाओं की योनि को कसने के लिए धनुरासन योग करना फायदेमंद होता है। धनुरासन योग को करने के लिए एक योगा मैट को जमीन पर बिछा के उस पर पेट के बल लेट जाएं। अब अपने दोनों हाथों को शरीर के समांतर रखें, अब अपने दोनों पैरों को पीछे की ओर घुटनों के यहाँ से मोड़े। अपने हाथों को पीछे की ओर ले जाएं और दोनों पैरों को दोनों हाथों से पकड़ लें। इस आसन में कम से कम 20 से 30 सेकंड तक रुकने का प्रयास करें। अंत में दोनों हाथों को खोल के अपनी प्रारंभिक स्थिति में आयें।

योनि को टाइट करने के लिए योग बद्ध कोणासन

बद्ध कोणासन योग करना उन महिलाओं के लिए लाभदायक होता है जो अपनी योनि को टाइट करना चाहती है। यह योग पेल्विक क्षेत्र की मांसपेशियों में कसावट लाने में मदद करता है।

बद्ध कोणासन योग को करने के लिए आप सबसे पहले एक योगा मैट को साफ जगह में बिछा के दोनों पैरों को सीधा करके बैठ जाएं। इसके बाद दोनों पैर को अपनी ओर मोड़ लें और दोनों पैरों के पंजों से पंजे मिलाएं। अब दोनों हाथों से घुटनों को धीरे-धीरे दबाएँ जिससे दोनों घुटने फर्श पर रख जाएं। इस मुद्रा को आप 2 से 3 मिनिट के लिए करें।

नियमित इस योग का आभ्यास करने से कुछ ही दिनों में आपकी योनि पहले जैसे टाइट हो जायेगी।

वजाइना टाइट करने के लिए योग बालासन

योनि को टाइट करने के लिए बालासन योग बहुत फायदेमंद माना जाता है। चाइल्ड पोज़ या बालासन योग पेल्विक मसल्स को कसने का काम करता है, जिसकी वजह से योनि को टाइट किया जा सकता है।

इस आसन को करने के लिए आप एक योगा मैट को बिछा के उस पर वज्रासन में या घुटने टेक के बैठ जाएं। अब धीरे-धीरे अपने सिर को झुकाते जाएं और जमीन पर सिर को रखें। अपने दोनों हाथों को सामने की ओर सीधे करके फर्श पर रखें। इस आसन में आप कम से कम 2 से 3 मिनिट रहने का प्रयास करें।

योनि को टाइट करने के आलावा यह आसन कमर दर्द को ठीक करता हैं और साथ ही आपकी मासिक थकान को कम करने में मदद करता हैं।

योनि को टाइट करने के लिए योग सेतुबंध आसन

महिलाएं अपनी वजाइना टाइट करने के लिए ब्रिज पोज योग को कर सकती है, यह एक प्रकार की कीगल एक्सरसाइज है जो आपकी योनि में कसाव लाने में मदद करती है।

सेतुबंध आसन को करने के लिए आप एक योगा मैट को बिछा के सीधे यानि पीठ के बल लेट जाएं। इसके बाद अपने पैरों को घुटनों के यहाँ से मोड़े और अपने कूल्हों को फर्श से ऊपर उठायें। अपने दोनों हाथों को पीठ के नीचे लाएं और दोनों को आपस में जोड़ लें। ब्रिज आसन में रहते हुए आप 20 बार साँस लें और और फिर अपनी प्रारंभिक स्थिति में आ जाएं।

“योग विज्ञान है” – ओशो

 योग विज्ञान है, विश्वास नहीं। योग की अनुभूति के लिए किसी तरह की श्रद्धा आवश्यक नहीं है। योग का इस्लाम, हिंदू, जैन या ईसाई से कोई संबंध नहीं है। 

जिन्हें हम धर्म कहते हैं वे विश्वासों के साथी हैं। योग विश्वासों का नहीं है, जीवन सत्य की दिशा में किए गए वैज्ञानिक प्रयोगों की सूत्रवत प्रणाली है। इसलिए पहली बात मैं आपसे कहना चाहूंगा वह यह कि  योग विज्ञान है, विश्वास नहीं। योग की अनुभूति के लिए किसी तरह की श्रद्धा आवश्यक नहीं है। योग के प्रयोग के लिए किसी तरह के अंधेपन की कोई जरूरत नहीं है।

नास्तिक भी योग के प्रयोग में उसी तरह प्रवेश पा सकता है जैसे आस्तिक। योग नास्तिक-आस्तिक की भी चिंता नहीं करता है। विज्ञान आपकी धारणाओं पर निर्भर नहीं होता; विपरीत, विज्ञान के कारण आपको अपनी धारणाएं परिवर्तित करनी पड़ती हैं। कोई विज्ञान आपसे किसी प्रकार के बिलीफ, किसी तरह की मान्यता की अपेक्षा नहीं करता है। विज्ञान सिर्फ प्रयोग की, एक्सपेरिमेंट की अपेक्षा करता है।