मत्स्यासन करने का तरीका
फर्श पर चटाई बिछाएं और सीधे होकर बैठ जाएं, इसके बाद अपने दाएं पैर को बाएं पैर के जंघे (thigh) पर और बाएं पैर को दाएं पैर के जंघे पर रखकर पद्मासन की मुद्रा में बैठ जाएं।
- Read more about मत्स्यासन करने का तरीका
- Log in to post comments
मत्स्यासन के फायदे और करने का तरीका
मत्स्यासन एक ऐसा आसन है जिसमें गर्दन और कमर को पीछे की ओर झुकाकर मछली के आकार के पोज में इस आसन का अभ्यास किया जाता है। चूंकि इस आसन में गर्दन को पीछे की ओर झुकाया जाता है इसलिए यह थॉयराइड ग्लैंड पर बेहतर प्रभाव डालता है और मन को ठीक रखने में सहायक होता है। इस लेख में आप मत्स्यासन के फायदे और मत्स्यासन करने का तरीका बताने वाले है मत्स्यासन संस्कृत के दो शब्दों मत्स्य और आसन से संयुक्त रूप से मिलकर बना है। जहां मत्स्य का अर्थ मछली (fish) और आसन का अर्थ आसन (posture) से है। मत्स्यायन को अंग्रेजी में Fish Pose कहा जाता है। मत्स्यासन सभी आसनों की ही तरह शरीर के लिए ला
- Read more about मत्स्यासन के फायदे और करने का तरीका
- Log in to post comments
Quad Extensions
अधोमुख श्वानासन करते समय सावधानियां
हालांकि अधोमुख श्वानासन बहुत ही लाभदायक योग मुद्रा है लेकिन इस आसन का अभ्यास करते समय कुछ सावधानियां बरतनी चाहिए अन्यथा इससे नुकसान हो सकता है।यदि आपकी कलाई में किसी तरह की समस्या है तो इस आसन को करते समय सावधानी बरतें अन्यथा स्थिति गंभीर हो सकती है।
इस आसन को करते समय यदि आपको महसूस होता है कि हाथों पर शरीर का अधिक भार आ गया है तो इसे कूल्हों की ओर ले जाने का प्रयास करें अन्यथा हाथों में दर्द पैदा हो सकता है।
यदि पीठ, कमर, कंधों और भुजाओं में चोट लगी हो तो इस आसन को करने से बचें।
- Read more about अधोमुख श्वानासन करते समय सावधानियां
- Log in to post comments
इंसोमेनिया दूर करने में अधोमुख श्वानासन के फायदे
अधोमुख श्वानासन करने से पीठ दर्द और कमर का दर्द, थकान, सिर दर्द और अनिद्रा की बीमारी दूर हो जात है। इसके अलावा यह आसन उच्च रक्त चाप, अस्थमा, साइटिका आदि रोग भी दूर करने में सहायक होता है।
अधोमुख श्वानासन के फायदे एनर्जी प्रदान करने में
अधोमुख श्वानासन करने से शरीर में अतिरिक्त ऊर्जा का संचार होता है। इसके अलावा यह पूरे शरीर का कायाकल्प करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसके अलावा यह आसन महिलाओं में मेनोपॉज (menopause) के लक्षणों को दूर करने में मदद करता है।
अधोमुख श्वानासन के फायदे चिंता दूर करने में
अधोमुख श्वानासन करने से दिमाग शांत रहता है और हर तरह की चिंता से मुक्ति मिलती है। इस आसन को करने से गर्दन और गर्दन की हड्डी (cervical spine) में खिंचाव उत्पन्न होता है जिसके कारण मस्तिष्क से चिंता दूर हो जाती है।
- Read more about अधोमुख श्वानासन के फायदे चिंता दूर करने में
- Log in to post comments
हाथों और पैरों को टोन करने में अधोमुख श्वानासन के फायदे
अधोमुख श्वानासन को करने के दौरान शरीर का पूरा भार हाथों और पैरों पर आकर टिकता है। इसलिए यह हाथों, पैरों एवं अन्य अंगों को टोन करने का काम करता है और उन्हें संतुलन की अवस्था में रखता है। यह आसन हाथ, पैरों के अलावा कंधे, बांहों और सीने को भी टोन करने के साथ मजबूती प्रदान करता है।
अधोमुख श्वानासन के फायदे पाचन सुधारने में
हालांकि अधोमुख श्वानासन में शरीर को आधा ही मोड़ा जाता है लेकिन इससे पेट की मांसपेशियां पाचन तंत्र के अंगों जैसे लिवर, किडनी और प्लीहा (spleen) पर दबाव डालकर इसे संकुचित करती हैं जिसके कारण पाचन क्रिया (digestive system) बेहतर होती है।
- Read more about अधोमुख श्वानासन के फायदे पाचन सुधारने में
- Log in to post comments
अधोमुख श्वानासन के फायदे ब्लड सर्कुलेशन बेहतर बनाने में
अधोमुख आसन में वास्तव में शरीर के कूल्हों को ऊपर उठाया जाता है और सिर को हृदय के नीचे झुकाया जात है। इससे उटली तरफ गुरुत्वाकर्षण बल लगता है जिससे ताजे रक्त (fresh blood) का प्रवाह होता है और इसके कारण ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है।
“योग विज्ञान है” – ओशो
योग विज्ञान है, विश्वास नहीं। योग की अनुभूति के लिए किसी तरह की श्रद्धा आवश्यक नहीं है। योग का इस्लाम, हिंदू, जैन या ईसाई से कोई संबंध नहीं है।
जिन्हें हम धर्म कहते हैं वे विश्वासों के साथी हैं। योग विश्वासों का नहीं है, जीवन सत्य की दिशा में किए गए वैज्ञानिक प्रयोगों की सूत्रवत प्रणाली है। इसलिए पहली बात मैं आपसे कहना चाहूंगा वह यह कि योग विज्ञान है, विश्वास नहीं। योग की अनुभूति के लिए किसी तरह की श्रद्धा आवश्यक नहीं है। योग के प्रयोग के लिए किसी तरह के अंधेपन की कोई जरूरत नहीं है।
नास्तिक भी योग के प्रयोग में उसी तरह प्रवेश पा सकता है जैसे आस्तिक। योग नास्तिक-आस्तिक की भी चिंता नहीं करता है। विज्ञान आपकी धारणाओं पर निर्भर नहीं होता; विपरीत, विज्ञान के कारण आपको अपनी धारणाएं परिवर्तित करनी पड़ती हैं। कोई विज्ञान आपसे किसी प्रकार के बिलीफ, किसी तरह की मान्यता की अपेक्षा नहीं करता है। विज्ञान सिर्फ प्रयोग की, एक्सपेरिमेंट की अपेक्षा करता है।