योग से पाएं खतरनाक रोगों पर नियंत्रण
किसी कठिन और थका देने वाली दो-ढाई घंटे लंबी कसरत के बजाय बीस से तीस मिनट तक किया जाने वाला योगाभ्यास ज्यादा कारगर होता है। कसरत में फिर भी नुकसान की गुंजाइश रहती है क्योंकि पता नहीं शरीर में कौन सा रोग पल रहा है और की जा रही कसरत अपने दबाव से उस रोग को बढ़ा या बिगाड़ दे।
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मंदिर बनाने का नक्शा
|| प्राचीन भारत में मंदिर बनाने का नक्शा ||
|| कुण्डलिनी जाग्रत करने के स्थान थे प्राचीन मंदिर ||
प्राचीन भारत में मंदिर बनाने से पहले जगह और दिशा का विशेष महत्व होता था | मंदिरो का निर्माण अलग अलग शैलियों के हिसाब से हुआ करता था पर अधिकतर मंदिर ऐसी पद्धति से बनते थे जिसमे हर एक कुण्डलिनी चक्र के हिसाब से गर्भगृह, मंडप, प्रस्थान, परिक्रमा आदि का निर्माण होता था और जिस चक्र के हिसाब से उस जगह का निर्माण होता था वहा व्यक्ति को चलकर या बैठकर उस चक्र को जागृत करने में सहयोग मिलता था |
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कमर दर्द के लिए 4 योगासन
कमर का दर्म कमर तोड़ देता है। कमर का दर्द असहनीय होता है। पीठ दर्द, कमर दर्द, सरवाइकल और कमर से जुड़ी अन्य समस्याएं आम हो गई है। डॉक्टर भी कहते हैं कि इसका सबसे अच्छा इलाज योग (Yoga for Back pain) ही है। आओ जानते हैं कि वह कौन से आसन हैं जिससे कमर का दर्द ठीक हो जाता है। ये चार आसन है- मकरासन, भुजंगासन, हलासन और अर्ध मत्येन्द्रासन।
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शरीर को ताकतवर बनाने के घरेलू उपाय और तरीके
ताकत की कमी न केवल आपको शारीरिक बल्कि भावनात्मक नुकसान भी पहुंचा सकती है। अक्सर लोगों द्वारा शरीर को ताकतवर बनाने के तरीके और घरेलू उपाय खोजे जाते हैं। यदि आप भी अपने शरीर का स्टैमिना बढ़ाना चाहते हैं तो ताकत बढ़ाने के उपाय अपना सकते हैं। वैसे तो अपनी आवश्यकता के अनुसार शरीर खुद ही ऊर्जा उत्पन्न करता है। लेकिन शरीर में ऊर्जा उत्पादन में वृद्धि के लिए आपको विशेष खाद्य पदार्थों का सेवन करने की आवश्यकता है। जो आपकी आवश्यकता से अधिक ऊर्जा उत्पादन में सहायक होते हैं।
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जॉगिंग के लिए एक नियमित समय निर्धारित करें
एक नियमित कार्यक्रम रखना एक व्यायाम दिनचर्या को बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण है। यदि आप जॉगिंग करते है तो आप उसका एक नियमित समय निर्धारित करें और प्रत्येक दिन उसका पालन करें। इसी समय के अनुसार आप एक स्थिर और नियमित व्यायाम आहार सेवन अवधि को बनायें रखें। यदि आप जॉगिंग के लिए अंधेरे में चल रहे हैं, तो चमकीले रंग के कपड़ें पहनें।
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शरीर मजबूत बनाने के उपाय प्रोटीन पाउडर
किसी भी अच्छे आहार में संपूर्ण खाद्य पदार्थों पर ध्यान देना चाहिए, जबकि कुछ ऐसे समय होते हैं जब पूरक आहार की खुराक फायदेमंद हो सकती है।
यदि आप अकेले खाद्य पदार्थों से पर्याप्त प्रोटीन प्राप्त करने के लिए संघर्ष करते हैं, तो आप अपनी दिनचर्या में प्रोटीन शेक को शामिल करने पर विचार कर सकते हैं।
व्हे प्रोटीन (मट्ठा प्रोटीन) और कैसिइन प्रोटीन जैसे डेयरी प्रोटीन पाउडर सबसे लोकप्रिय हैं।
हालाँकि, शरीर मजबूत बनाने के लिए प्रोटीन पाउडर अन्य विकल्प भी हैं। कुछ प्रोटीन पाउडर सोया, मटर, बीफ या चिकन प्रोटीन का उपयोग करते हैं।
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शरीर बनाने की दवा है अखरोट
ओमेगा-3 फैटी एसिड प्राप्त करने का सबसे अच्छा तरीका मछली का सेवन करना है। लेकिन जो लोग शाकाहारी होते हैं उनहें ओमेगा-3 फैटी एसिड प्राप्त करने के लिए अखरोट का उपयोग किया जाना चाहिए। अखरोट का नियमत सेवन हृदय को स्वस्थ रखने में सहायक होता हे। इसके अलावा आप अपने शरीर की फिटनेस को बनाए रखने और शरीर की ताकत में वृद्धि करने के लिए भी अखरोट का उपयोग कर सकते हैं। जानकारों के अनुसार अखरोट में स्वस्थ वसा के साथ ही ऐसे पोषक तत्व और खजिन पदार्थ होते हैं जो शरीर में खराब कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करने में सहायक होते हैं। शरीर की कार्यक्षमता को बढ़ाने के लिए आप अपने दैनिक आहार में कुछ अखरोट को शा
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उड्डीयान बंध
जैसे-जैसे हमारी उम्र बढ़ने लगती है, वैसे-वैसे हमारी त्वचा ढीली होने लगती है और साथ ही हमारा पेट बढ़ने लगता है। हमारे शरीर की जिन नदियों में रक्त बहता है, वो भी कमजोर हो जाता है। ऐसी समस्या से हर किसी को गुजरना पड़ता है, लेकिन जब हम उड्डियान बंध को करते हैं, तो इससे हमारी बढ़ती हुई आयु पर असर होता है। इसको करने से व्यक्ति अपने आप को तरोताजा और युवा महसूस करता है। इस बंध के कारण हमारी आँख, कान, नाक और मुंह अर्थात हमारे सातों द्वार बंद हो जाते हैं। जिसके फलस्वरूप प्राण सुषुम्ना में प्रविष्ट होकर ऊपर की ओर उड़ान भरने लगते हैं। यही कारण है कि हम इसे उड्डीयान बंध कहते हैं, उड्डीयान बंध, बंध योग&n
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उष्ट्रासन
उष्ट्रासन की अंतिम अवस्था में पहुंचने के बाद हमारे शरीर की आकृति कुछ-कुछ ऊंट के समान प्रतीत होती है, इसी कारण इसे उष्ट्रासन कहते हैं। यह आसन वज्रासन में बैठकर किया जाता है। उष्ट्रासन शरीर के अलगे भाग को लचीला और मजबूत बनाता है। इस आसन से छाती फैलती है और फेफड़ों की कार्यक्षमता में बढ़ोतरी होती है। मेरुदंड एवं पीठ को मजबूत और सुदृड़ बनाने के लिए भी इस आसन का अभ्यास किया जाता है। गले संबंधी रोग में भी यह आसन लाभदायक है। उदर संबंधी रोग, जैसे कांस्टीपेशन, इनडाइजेशन, एसिडिटी रोग निवारण में इस आसन से सहायता मिलती है। गले संबंधी रोगों में भी यह आसन लाभदायक है।
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अपान मुद्रा
विधि-
सर्वप्रथम वज्रासन / पद्मासन या सुखासन में बैठ जाइए।
अब मध्यमा और अनामिका उंगली को आपस में मिलाकर अंगूठे के अग्र भाग से स्पर्श कीजिए ।अन्य दो उंगलियों को सीधा रखिए।
हाथों को घुटनो पर रखिए हथेलियों को आकाश की तरफ रखेंगे।
आँखे बंद रखते हुए श्वांस सामान्य बनाएँगे।
अपने मन को अपनी श्वांस गति पर केंद्रित रखिए।
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“योग विज्ञान है” – ओशो
योग विज्ञान है, विश्वास नहीं। योग की अनुभूति के लिए किसी तरह की श्रद्धा आवश्यक नहीं है। योग का इस्लाम, हिंदू, जैन या ईसाई से कोई संबंध नहीं है।
जिन्हें हम धर्म कहते हैं वे विश्वासों के साथी हैं। योग विश्वासों का नहीं है, जीवन सत्य की दिशा में किए गए वैज्ञानिक प्रयोगों की सूत्रवत प्रणाली है। इसलिए पहली बात मैं आपसे कहना चाहूंगा वह यह कि योग विज्ञान है, विश्वास नहीं। योग की अनुभूति के लिए किसी तरह की श्रद्धा आवश्यक नहीं है। योग के प्रयोग के लिए किसी तरह के अंधेपन की कोई जरूरत नहीं है।
नास्तिक भी योग के प्रयोग में उसी तरह प्रवेश पा सकता है जैसे आस्तिक। योग नास्तिक-आस्तिक की भी चिंता नहीं करता है। विज्ञान आपकी धारणाओं पर निर्भर नहीं होता; विपरीत, विज्ञान के कारण आपको अपनी धारणाएं परिवर्तित करनी पड़ती हैं। कोई विज्ञान आपसे किसी प्रकार के बिलीफ, किसी तरह की मान्यता की अपेक्षा नहीं करता है। विज्ञान सिर्फ प्रयोग की, एक्सपेरिमेंट की अपेक्षा करता है।