कर्णपीड़ासन – विधि -लाभ

कर्णपीड़ासन :- इस आसन को करने से कान में पीड़ा होती है इसीलिए इसे कर्णपीड़ासन कहते है

विधि 

  • पीठ के बल धरती पर लेट जाइए।
  • अपने दोनों पैरों को उठायें और पीछेे की ओर इतना ले जाएँ की दोनों घुटने कानों को छुएं।
  • इस स्थिति में स्थिर रहें।        

लाभ 

  • इस आसन के निरंतर अभ्यास से मस्तिष्क, गला, नाक, कान, इत्यादि शारीरिक अंगो को लाभ होता है।
  • आँखों की रौशनी बढ़ती है।
  • मोटापा, श्वास से सम्बंधित रोग जैसे दमा, कान के रोग, बवासीर, कब्ज़, रक्त के दोष, इत्यादि रोग दूर होते हैं